विश्व मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
भारत की विदेश नीति “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः” के दर्शन पर आधारित है, जिसका अर्थ है “सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों”। स्वतंत्रता के बाद से, भारत ने एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है और विश्व शांति और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाई है।
कुछ प्रमुख पहलू:
गुटनिरपेक्षता: भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शीत युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरा।
सद्भावनापूर्ण संबंध: भारत ने अपने पड़ोसी देशों के साथ सद्भावपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया है।
आर्थिक सहयोग: भारत ने विभिन्न देशों के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौते किए हैं।
विकास सहयोग: भारत ने विकासशील देशों के विकास में सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न पहल की हैं।
संयुक्त राष्ट्र में सक्रियता: भारत संयुक्त राष्ट्र में एक सक्रिय सदस्य है और विश्व शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
आगे की राह:
आज, भारत एक उभरती हुई विश्व शक्ति के रूप में उभर रहा है और वैश्विक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। भारत की विदेश नीति में आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।


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