-15 किलोमीटर पैदल पंचकोसी वारुणी यात्रा का वरुणा और भागीरथी नदी के संगम बड़ेथी से हुआ शुभारंभ।
– पड़ावों पर ग्रामीणों ने निस्वार्थ भाव से यात्रियों के स्वागत के साथ कराई जलपान और फलाहार की व्यवस्था
उत्तरकाशी। पौराणिक पंच कोसी वारूणी यात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने वरुणावत पर्वत की परिक्रमा के साथ मंदिर में जलाभिषेक कर पुष्य लाभ अर्जित किया।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी पांच कोस यानि 15 किलोमीटर पैदल पंचकोसी वारुणी यात्रा का शुभारंभ वरुणा और भागीरथी नदी के संगम बड़ेथी से हुआ। श्रद्धालुओं ने यहां पर गंगा स्नान के बाद जल लेकर वरुणावत पर्वत की परिक्रमा के लिए रवाना हुए।

तेज धूप और खड़ी चढ़ाई के बाद भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। इस मौके पर सैकड़ों यात्रियों ने बसूंगा में रेणुका देवी, कंडार देवता सहित साल्ड गांव में जग्गनाथ मंदिर, अष्टभुजा माता और उसके बाद ज्ञाणजा गांव में ज्वाला माता, ज्ञानेश्वर महादेव, व्यास कुंड और वरुणावत पर्वत के शीर्ष पर जलाभिषेक कर यात्रा का पुष्य लाभ अर्जित किया।

इसके बाद यात्रा नीचे उतरते ही संग्राली में विमलेश्वर महादेव, कंडार देवता, पाटा में नर्मदेश्वर, दुर्गा माता के दर्शन के बाद श्रद्धालु अस्सी गंगा और भागीरथी नदी के संगम गंगोरी पर पहुंचे। यहां पर विधिवत पूजा के बाद दोबारा जल भरकर काशी विश्वनाथ मंदि में जलाभिषेक के बाद यात्रा का समापन किया। यात्रा के दौरान पड़ाव के सभी गांव के ग्रामीणों ने निस्वार्थ भाव से यात्रियों के स्वागत के साथ उनके जलपान और फलाहार की व्यवस्था की। मान्यता है कि पंचकोसीवारूणी यात्रा से श्रद्धालुओं को भोले के 12 ज्यार्तिलिंगों और 33 कोटी देवी-देवताओं का आशीवार्द मिलता है।


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